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Hindi stories


 

राजा भोज और गंगुबाई की न्याय प्रियता 




प्राचीन समय में राजा भोज अपने न्याय और प्रजा के प्रति दया के लिए प्रसिद्ध थे। उनका दरबार विद्वानों और गुणी जनों से भरा रहता था। एक दिन उनके दरबार में गंगूबाई नाम की एक गरीब महिला पहुँची। उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं।


राजा भोज ने महिला से पूछा, "तुम इतनी परेशान क्यों हो? अपनी समस्या बताओ।"


गंगूबाई ने जवाब दिया, "महाराज, मैं एक विधवा हूँ और मेहनत-मजदूरी करके अपना जीवन यापन करती हूँ। कुछ समय पहले मैंने अपनी बचत से एक बकरा खरीदा था, जो मेरी आय का मुख्य स्रोत था। लेकिन कल रात मेरा बकरा चोरी हो गया।"


राजा ने पूछा, "क्या तुम्हें किसी पर शक है?"


गंगूबाई बोली, "महाराज, गाँव के धनी व्यापारी हरिहर पर मुझे शक है। मेरे बकरे की आवाज़ मैंने रात में उसके घर के पास सुनी थी। लेकिन वह इतना शक्तिशाली है कि मैं उसे बिना सबूत के दोषी नहीं ठहरा सकती।"


राजा भोज ने तुरंत हरिहर को दरबार में बुलाने का आदेश दिया। हरिहर दरबार में आया और राजा ने उससे पूछा, "हरिहर, क्या तुमने गंगूबाई का बकरा चुराया है?"


हरिहर ने आत्मविश्वास से कहा, "नहीं महाराज, मैं ऐसा क्यों करूँगा? मैं तो एक अमीर व्यापारी हूँ। मुझे किसी का बकरा चुराने की ज़रूरत नहीं।"


राजा भोज ने गंगूबाई की ओर देखा। गंगूबाई ने हाथ जोड़कर कहा, "महाराज, मुझे यकीन है कि मेरा बकरा हरिहर के पास है। लेकिन मेरे पास कोई ठोस सबूत नहीं है।"


राजा भोज ने विचार किया और अपने मंत्रियों से कहा, "मैं इस मामले की सच्चाई जानने के लिए एक योजना बनाना चाहता हूँ।"


उस रात राजा भोज ने अपने सिपाहियों को हरिहर के घर भेजा। उन्होंने हरिहर के घर की तलाशी ली लेकिन बकरा नहीं मिला। सिपाहियों ने राजा को इसकी जानकारी दी।


अगले दिन राजा भोज ने पूरे गाँव को एकत्रित किया और घोषणा की, "जो भी गंगूबाई का बकरा लौटाएगा, उसे इनाम मिलेगा। लेकिन अगर चोर खुद सामने नहीं आया, तो मैं अपना निर्णय कठोर बनाऊँगा।"


हरिहर घबरा गया। उसने सोचा, "अगर राजा को सच्चाई पता चल गई, तो मुझे दंड मिलेगा।" आखिरकार, उसने गंगूबाई का बकरा लौटाने का फैसला किया।


हरिहर ने बकरा दरबार में लाकर गंगूबाई को सौंप दिया और अपनी गलती स्वीकार की। राजा भोज ने कहा, "हरिहर, तुम्हारे जैसे अमीर व्यक्ति को गरीबों के साथ अन्याय नहीं करना चाहिए। आज मैं तुम्हें क्षमा करता हूँ, लेकिन अगर भविष्य में तुमने ऐसा किया, तो कड़ी सजा दी जाएगी।"


गंगूबाई ने राजा का आभार प्रकट किया और अपने बकरे को लेकर खुशी-खुशी घर लौट गई।


शिक्षा: न्यायप्रियता और धैर्य के साथ कठिन से कठिन समस्या को सुलझाया जा सकता है।

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